Oct 22, 2016

उसको तो फ़र्क पड़ता है

एक बार समुद्री तूफ़ान के बाद हजारों लाखों मछलियाँ किनारे पर रेत पर तड़प तड़प कर मर रहीँ थीं ! इस भयानक स्थिति को देखकर पास में रहने वाले एक 6 वर्ष के बच्चे से रहा नहीं गया, और वह एक एक मछली उठा कर समुद्र में वापस फेकनें लगा !

यह देख कर उसकी माँ बोली, बेटा लाखों की संख्या में है , तू कितनों की जान बचाएगा ,यह सुनकर बच्चे ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी, माँ फिर बोली बेटा रहनें दे कोई फ़र्क नहीं पड़ता ! बच्चा जोर जोर से रोने लगा और एक मछली को समुद्र में फेकतें हुए जोर से बोला माँ "इसको तो फ़र्क पड़ता है"

दूसरी मछली को उठाता और फिर बोलता माँ "इसको तो फ़र्क पड़ता हैं" ! माँ ने बच्चे को सीने से लगा लिया !

हो सके तो लोगों को हमेशा होंसला और उम्मीद देनें की कोशिश करो, न जानें कब आपकी वजह से किसी की जिन्दगी वदल जाए!

क्योंकि आपको कोई फ़र्क नहीं पड़ता पर "उसको तो फ़र्क पड़ता है"


Hidden Countries

Find the name of a country hidden in the consecutive letters within these sentences....
 

For example, FRANCE is hiding in the sentence, "The runners who lived at the top of the cliff ran centuries ago". (clifF RAN CEenturies).

1. You all must pay it back, or each of you will be in trouble.

2. Was Doctor Dolittle's favorite animal a glib yak?

3. A true optimist will never let hope rush away.

4. How often can a daydream come true?

5. Is there a health spa in this hotel?

6. They are going in diametrically opposite directions.

7. Is the county fair a nice place to visit?

8. The foot with which I lead is my left one.

9. He owns a ranch in Arizona.

10. The foods we deny ourselves are usually tasty....!!


Jul 6, 2016

इंजिनियर और डॉक्टर

एक इंजिनियर को जॉब नही मिली तो उसने क्लिनिक खोला और बाहर लिखा 'तीन सौ रूपये मे ईलाज करवाये
ईलाज नही हुआ तो एक हजार रूपये वापिस'….

एक डॉक्टर ने सोचा कि एक हजार रूपये कमाने का अच्छा मौका है वो क्लिनिक पर गया और बोला, "मुझे किसी भी चीज का स्वाद नही आता है"

इंजिनियर : बॉक्स नं.२२ से दवा निकालो और ३ बूँद पिलाओ

नर्स ने पिला दी

मरीज(डॉक्टर) : ये तो पेट्रोल है

इंजिनियर : मुबारक हो आपको टेस्ट महसूस हो गया, लाओ तीन सौ रूपये…

डॉक्टर को गुस्सा आ गया.......कुछ दिन बाद फिर वापिस गया, पुराने पैसे वसूलने.....

मरीज(डॉक्टर) : साहब मेरी याददास्त कमजोर हो गई है......

इंजिनियर : बॉक्स नं. २२ से दवा निकालो और ३ बूँद पिलाओ......

मरीज (डॉक्टर) : लेकिन वो दवा तो जुबान की टेस्ट के लिए है.....

इंजिनियर : ये लो तुम्हारी याददास्त भी वापस आ गई, लाओ तीन सौ रुपए…

इस बार डॉक्टर गुस्से में गया

मरीज(डॉक्टर) : मेरी नजर कम हो गई है........

इंजीनियर : इसकी दवाई मेरे पास नहीं है। लो एक हजार रुपये।

मरीज(डॉक्टर) : यह तो पांच सौ का नोट है।

इंजीनियर : आ गई नजर। ला तीन सौ रुपये.......


सौ ऊंट

किसी  शहर  में, एक आदमी प्राइवेट  कंपनी  में  जॉब  करता था . वो  अपनी  ज़िन्दगी  से  खुश  नहीं  था , हर  समय  वो  किसी  न  किसी  समस्या  से  परेशान  रहता  था .

एक बार  शहर  से  कुछ  दूरी  पर  एक  महात्मा  का  काफिला  रुका . शहर  में  चारों  और  उन्ही की चर्चा  थी.

बहुत  से  लोग  अपनी  समस्याएं  लेकर  उनके  पास  पहुँचने  लगे ,उस आदमी  ने  भी  महात्मा  के  दर्शन  करने  का  निश्चय  किया .

छुट्टी के दिन  सुबह -सुबह ही उनके  काफिले  तक  पहुंचा . बहुत इंतज़ार  के  बाद उसका  का  नंबर  आया .

वह  बाबा  से  बोला  ,” बाबा , मैं  अपने  जीवन  से  बहुत  दुखी  हूँ , हर  समय  समस्याएं  मुझे  घेरी  रहती  हैं , कभी ऑफिस  की  टेंशन  रहती  है , तो  कभी  घर  पर  अनबन  हो  जाती  है , और  कभी  अपने  सेहत  को  लेकर  परेशान रहता  हूँ ….

बाबा  कोई  ऐसा  उपाय  बताइये  कि  मेरे  जीवन  से  सभी  समस्याएं  ख़त्म  हो  जाएं  और  मैं  चैन  से  जी सकूँ?

बाबा  मुस्कुराये  और  बोले, “ पुत्र  , आज  बहुत देर  हो  गयी  है  मैं  तुम्हारे  प्रश्न  का  उत्तर  कल  सुबह दूंगा … लेकिन क्या  तुम  मेरा  एक  छोटा  सा  काम  करोगे …?”

“हमारे  काफिले  में  सौ ऊंट हैं, मैं  चाहता हूँ  कि  आज  रात  तुम  इनका  खयाल  रखो …जब  सौ  के  सौ  ऊंट बैठ  जाएं  तो  तुम   भी  सो  जाना …”,

ऐसा कहते  हुए   महात्मा अपने  तम्बू  में  चले  गए ..

अगली  सुबह  महात्मा उस आदमी  से  मिले  और  पुछा , “ कहो  बेटा , नींद  अच्छी  आई .”

वो  दुखी  होते  हुए  बोला, “कहाँ  बाबा, मैं  तो  एक  पल  भी  नहीं  सो  पाया. मैंने  बहुत  कोशिश  की  पर  मैं  सभी  ऊंटों को  नहीं  बैठा  पाया , कोई  न  कोई  ऊंट खड़ा  हो  ही  जाता …!!!

बाबा बोले, “ बेटा, कल  रात  तुमने  अनुभव  किया कि  चाहे  कितनी  भी  कोशिश  कर  लो  सारे  ऊंट एक  साथ  नहीं  बैठ  सकते …तुम  एक  को  बैठाओगे  तो  कहीं  और  कोई  दूसरा  खड़ा  हो  जाएगा....इसी  तरह  तुम एक  समस्या  का  समाधान  करोगे  तो  किसी  कारणवश  दूसरी खड़ी हो  जाएगी ..

पुत्र  जब  तक  जीवन  है  ये समस्याएं  तो  बनी  ही  रहती  हैं … कभी  कम  तो  कभी  ज्यादा ….”

“तो  हमें  क्या  करना चाहिए  ?” , आदमी  ने  जिज्ञासावश  पुछा .

“इन  समस्याओं  के  बावजूद  जीवन  का  आनंद  लेना  सीखो …

कल  रात  क्या  हुआ ?
1) कई  ऊंट रात होते -होते  खुद ही  बैठ  गए  ,
2) कई  तुमने  अपने  प्रयास  से  बैठा  दिए ,
3) बहुत  से  ऊंट तुम्हारे  प्रयास  के  बाद  भी नहीं बैठे … और बाद  में  तुमने  पाया  कि उनमे से कुछ खुद ही  बैठ  गए ….

कुछ  समझे ….?? समस्याएं  भी  ऐसी  ही  होती  हैं..

1) कुछ  तो  अपने आप ही ख़त्म  हो  जाती  हैं ,
2) कुछ  को  तुम  अपने  प्रयास  से  हल  कर लेते  हो …
3) कुछ  तुम्हारे  बहुत  कोशिश  करने  पर   भी  हल  नहीं  होतीं ,

ऐसी  समस्याओं  को   समय  पर  छोड़  दो … उचित  समय  पर  वे खुद  ही  ख़त्म  हो  जाती  हैं.!!

जीवन  है, तो  कुछ समस्याएं रहेंगी  ही  रहेंगी …. पर  इसका  ये  मतलब  नहीं  की  तुम  दिन  रात  उन्ही  के  बारे  में  सोचते  रहो …समस्याओं को  एक  तरफ  रखो  और  जीवन  का  आनंद  लो…चैन की नींद सो …जब  उनका  समय  आएगा  वो  खुद  ही  हल  हो  जाएँगी"...


ONLY

Professor Ernest Brennecke of Columbia is credited with inventing a sentence that can be made to have eight different meanings by placing ONE WORD in all possible positions in the sentence:

"I hit him in the eye yesterday."

The word is "ONLY".


The Message:

1. ONLY I hit him in the eye yesterday. (No one else did.)

2. I ONLY hit him in the eye yesterday. (Did not slap him.)

3. I hit ONLY him in the eye yesterday. (I did not hit others.)

4. I hit him ONLY in the eye yesterday (I did not hit outside the eye).

5. I hit him in ONLY the eye yesterday (Not other organs).

6. I hit him in the ONLY eye yesterday (He doesn't have another eye).

7. I hit him in the eye ONLY yesterday (Not today).

8. I hit him in the eye yesterday ONLY (Did not wait for today).


This is the beauty and complexity of the English language.